23 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ‘मध्य पूर्व में चल रही जंग’ पर संबोधित करते हुए देश को चेताया कि ईरान युद्ध के कारण भारत के सामने भी अप्रत्याशित चुनौतियाँ हैं। उन्होंने इस संकट को ‘चिंताजनक’ बताया और इसके लंबे समय तक बने रहने की आशंका व्यक्त की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड काल में भी देश ने एकजुटता से सप्लाई चेन संकट का सामना किया था और अब फिर से ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। इस जंग से पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर गहरा असर पड़ रहा है।
मुख्य बिंदु
- पीएम मोदी ने ईरान युद्ध के चलते भारत के सामने ‘अप्रत्याशित चुनौतियों’ पर चिंता जताई।
- युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ रहा है।
- सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल का भंडार सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं।
- होरमुज स्ट्रेट में स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
ईरान युद्ध: भारत के सामने अप्रत्याशित चुनौतियाँ
प्रधानमंत्री मोदी ने सदन को बताया कि मध्य पूर्व संकट अब तीन हफ्तों से अधिक हो चुका है। उन्होंने जोर दिया कि भारत के सामने इस युद्ध ने आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय जैसी कई अप्रत्याशित चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकार एक रणनीति के तहत काम कर रही है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया और संसदीय चर्चा की मांग
प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के बाद, संसद के बाहर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इस सारे मुद्दे पर संसद के भीतर चर्चा की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि पीएम ने नई बात नहीं कही है और चर्चा होने से सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा।
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भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक तैयारी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य में होरमुज स्ट्रेट में स्वतंत्र आवाजाही में बाधा को लेकर बात की, क्योंकि भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फ़र्टिलाइज़र जैसी चीज़ें इसी मार्ग से आती हैं। युद्ध के बाद से इस समुद्री मार्ग में जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है।
सरकार का प्रयास है कि पेट्रोल-डीज़ल और गैस की सप्लाई बहुत ज़्यादा प्रभावित न हो। भारत के पास कच्चे तेल का 53 लाख मिट्रिक टन का स्ट्रेटेजिक रिज़र्व है और अतिरिक्त 65 लाख मिट्रिक टन रिज़र्व बनाने पर काम हो रहा है। इसके अलावा, तेल कंपनियों के पास अपना अलग रिज़र्व है। सरकार सभी वैश्विक सहयोगियों से बातचीत कर रही है ताकि तेल, गैस, फ़र्टिलाइज़र वाले जहाज़ सुरक्षित भारत पहुँचें।
वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत और बचत के उपाय
संकट के इस समय में देश की अन्य तैयारियाँ भी काम आ रही हैं। पिछले 10 सालों में इथेनॉल के उत्पादन और ब्लेंडिंग में वृद्धि हुई है। आज पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग हो रही है, जिससे साढ़े चार करोड़ बैरल कम तेल आयात करना पड़ रहा है। रेलवे के बिजलीकरण से हर साल 180 करोड़ लीटर डीज़ल की बचत हो रही है। मेट्रो नेटवर्क 1100 किलोमीटर हो गया है, और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर भी बहुत अधिक बल दिया गया है। केंद्र ने राज्यों को 15 हज़ार इलेक्ट्रिक बसें दी हैं।
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भारतीयों की सुरक्षा और वापसी: सरकार के प्रयास
प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया के देशों के नेताओं से दो राउंड बात की है, जहाँ उन्होंने भारतीयों की सुरक्षा का विश्वास दिलाया है। हालांकि, दुर्भाग्य से कुछ भारतीयों की मृत्यु भी हुई है। प्रभावित देशों में मौजूद भारतीय मिशन वहाँ गए भारतीय पर्यटकों और वहाँ रह रहे लोगों के साथ 24 घंटे जुड़ा हुआ है और उनकी मदद कर रहा है।
युद्ध शुरू होने से लेकर अबतक 3 लाख 75 हज़ार भारतीय सुरक्षित लौटे हैं। ईरान से 1000 भारतीय सुरक्षित लौटे हैं, जिनमें 700 से अधिक मेडिकल पढ़ाई करने वाले युवा हैं। इन देशों में सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी है।
एलपीजी सप्लाई और घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता
प्रधानमंत्री ने बताया कि हमने देश में एलपीजी प्रोडक्शन को बढ़ाया है, क्योंकि देश अपनी ज़रूरत का 60 फ़ीसदी एलपीजी खुद ही उत्पादित करता है। देश में एलपीजी के घरेलू उपभोक्ताओं की ज़रूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि सप्लाई सुचारू रूप से जारी रहे।
शांति और स्थिरता की अपील
भारत ने शुरुआत से ही इस संघर्ष को लेकर शांति की अपील की है और तनाव को कम करने तथा संघर्ष को रोकने का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि होरमुज स्ट्रेट (समुद्री मार्ग) में स्वतंत्र आवाजाही में रुकावट किसी भी सूरत में अस्वीकार्य है।
सरकार की रणनीति और भविष्य की दिशा
भारत सरकार इस संकट में एक रणनीति के तहत काम कर रही है। सरकार हर सेक्टर के स्टेक होल्डर्स के साथ चर्चा कर रही है और एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप भी बनाया गया है जो हर दिन मिलता है और आवश्यक समाधान पर काम करता है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि भारत सरकार और उद्योग के साझा प्रयास से इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना कर सकेगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- Q1: ईरान युद्ध पर पीएम मोदी का मुख्य बयान क्या था?
- A1: पीएम मोदी ने कहा कि ईरान युद्ध के कारण भारत के सामने ‘अप्रत्याशित चुनौतियाँ’ हैं और हालात चिंताजनक हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर असर पड़ रहा है।
- Q2: भारत के लिए ईरान युद्ध से क्या चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं?
- A2: भारत के सामने आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं, विशेषकर ऊर्जा आपूर्ति और सप्लाई चेन को लेकर।
- Q3: भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
- A3: भारत ने कच्चे तेल का स्ट्रेटेजिक रिज़र्व बढ़ाया है, अतिरिक्त रिज़र्व बनाने पर काम कर रहा है, इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ा रहा है, और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
- Q4: युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से कितने भारतीय सुरक्षित लौटे हैं?
- A4: युद्ध शुरू होने से लेकर अबतक कुल 3 लाख 75 हज़ार भारतीय सुरक्षित लौटे हैं, जिनमें से 1000 भारतीय ईरान से आए हैं।