क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा कम होता है या एस्ट्रोजन हार्मोन उन्हें इससे बचाता है? अगर हाँ, तो आज आपके ये सारे मिथक टूटने वाले हैं। दरअसल, हृदय रोग भारतीय महिलाओं में मृत्यु का एक बहुत बड़ा कारण बन चुका है, और इसकी अनदेखी करना खतरनाक हो सकता है।
2019 में हुई ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज की एक स्टडी के मुताबिक, भारत में दिल की बीमारियों से होने वाली मौतों में 28% महिलाएं शामिल हैं। इसमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) सबसे प्रमुख है। आज हम 3 एक्सपर्ट्स – डॉ. प्राची शर्मा, डॉ. प्रीति शर्मा और डॉ. सरिता राव – की मदद से महिलाओं में हृदय स्वास्थ्य से जुड़े हर पहलू को समझेंगे।
मुख्य बिंदु
- महिलाएं भी पुरुषों की तरह ही हार्ट अटैक की चपेट में आती हैं, और अक्सर उन्हें 5-10 साल पहले यह बीमारी हो जाती है।
- PCOD से पीड़ित महिलाओं को हृदय रोगों का अधिक जोखिम होता है, क्योंकि इसमें मेटाबॉलिक डिसऑर्डर शामिल होते हैं।
- महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से अलग हो सकते हैं, जैसे पसीना आना, सांस फूलना या जबड़े में दर्द।
- मोटापा, डायबिटीज, हाइपरटेंशन और खराब लाइफस्टाइल हृदय रोगों के प्रमुख कारण हैं।
- नियमित व्यायाम और स्वस्थ आहार से 90% तक हार्ट अटैक रोके जा सकते हैं।
महिलाओं में हार्ट अटैक: एक बड़ा मिथक
आमतौर पर यह धारणा है कि हार्ट अटैक मुख्य रूप से पुरुषों को होता है। लेकिन यह बिल्कुल गलत है। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्राची शर्मा के अनुसार, “महिलाओं में भी हार्ट अटैक पुरुषों की तरह ही होता है और यह उनकी मौत का एक बड़ा कारण है। समय पर लक्षणों को पहचानना और इलाज कराना बेहद ज़रूरी है।”
डॉ. प्रीति शर्मा, कार्डियक साइंसेज़ विभाग की डायरेक्टर, बताती हैं कि महिलाओं के दिल की भी उतनी ही जल्दी और सही देखभाल ज़रूरी है, जितनी पुरुषों के दिल की होती है। हृदय रोग कोई लिंग-विशेष समस्या नहीं है।
भारतीय महिलाओं को पहले क्यों होता है हृदय रोग?
भारतीय महिलाएं पश्चिमी देशों की महिलाओं की तुलना में 5-10 साल पहले ही दिल की बीमारियों का शिकार हो जाती हैं। इसके पीछे कई गंभीर कारण हैं, जिनमें मोटापा, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, और व्यायाम की कमी शामिल हैं।
NFHS-5 (2019–21) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 24% महिलाएं ओवरवेट या ओबीज़ हैं, जबकि 21% को हाइपरटेंशन है। ये आंकड़े चिंताजनक हैं और महिला स्वास्थ्य के प्रति अधिक ध्यान देने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हैं।
युवा महिलाओं में बढ़ रहा है हार्ट अटैक का खतरा
सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सरिता राव बताती हैं कि 90 के दशक के आखिर में युवाओं में हार्ट अटैक के मामले 21% थे, जो अब बढ़कर 31% हो गए हैं। इसका सीधा संबंध बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ते स्ट्रेस लेवल, मोटापे और निष्क्रिय जीवनशैली से है।
भारतीयों को अक्सर लगभग 10 साल पहले हार्ट अटैक आ जाता है, और अब 30-40 साल की उम्र में भी यह देखने को मिल रहा है। इसका मतलब है कि कम उम्र का होना आपको इस बीमारी से सुरक्षित नहीं रखता है।
एस्ट्रोजन और हृदय रोग: क्या है सच्चाई?
एक बड़ा मिथक यह है कि एस्ट्रोजन हार्मोन महिलाओं को हृदय रोगों से बचाता है। जबकि यह आंशिक रूप से सच हो सकता है कि रजोनिवृत्ति से पहले एस्ट्रोजन कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करता है, यह पूरी तरह से बचाव नहीं है। रजोनिवृत्ति के बाद, यह सुरक्षा काफी कम हो जाती है, और महिलाओं में हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है।
असल में, हृदय रोग एक जटिल समस्या है जिसके कई कारक होते हैं। एस्ट्रोजन की भूमिका के बावजूद, अन्य जोखिम कारक जैसे अस्वस्थ जीवनशैली, आनुवंशिकी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं महिलाओं को समान रूप से प्रभावित करती हैं।
PCOD: हार्ट अटैक का एक अनदेखा जोखिम
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOD) महिलाओं में हार्मोन से जुड़ी एक आम समस्या है जो प्रजनन आयु वर्ग में होती है। डॉ. प्रीति शर्मा बताती हैं कि PCOD में सिर्फ हार्मोनल दिक्कतें ही नहीं, बल्कि मेटाबॉलिक डिसऑर्डर भी होते हैं।
इसमें हाई ब्लड प्रेशर, हाई इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज और मोटापे का खतरा अधिक होता है। ये सभी कारक मिलकर महिलाओं में कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को काफी बढ़ा देते हैं। इसलिए PCOD वाली युवा महिलाओं को अपनी हृदय स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है।
डॉ. सरिता राव भी इस बात पर ज़ोर देती हैं कि PCOD में शरीर के मेटाबॉलिक सिस्टम में कई गड़बड़ियां होती हैं, जिससे शुगर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। इन महिलाओं की कम उम्र से ही निगरानी और लाइफस्टाइल, कोलेस्ट्रॉल, शुगर व ब्लड प्रेशर को मॉनिटर करना अत्यंत आवश्यक है।
महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण
पुरुषों को आमतौर पर हार्ट अटैक के दौरान सीने में तेज जकड़न और भारीपन महसूस होता है। लेकिन महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर अलग होते हैं और उन्हें गलत समझा जा सकता है। डॉ. प्राची शर्मा बताती हैं कि महिलाओं को सीने में हल्का दर्द हो सकता है या दर्द बिलकुल भी न हो।
इसके बजाय, उन्हें अचानक बहुत ज़्यादा पसीना आने लगता है, सांस फूलने लगती है, जबड़े में दर्द हो सकता है, या अचानक बहुत ज़्यादा थकान महसूस होती है। ये लक्षण कई बार एसिडिटी, गैस या बदहजमी से मिलते-जुलते लगते हैं, जिससे महिलाएं इन्हें नज़रअंदाज़ कर देती हैं। यदि ऐसे लक्षण 15-20 मिनट से ज़्यादा रहें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
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बचाव के तरीके: स्वस्थ हृदय, स्वस्थ जीवन
अच्छी खबर यह है कि लगभग 90% तक हार्ट अटैक रोके जा सकते हैं। इसके लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी कदम उठाने होंगे:
- नियमित व्यायाम: रोज़ाना आधा घंटा व्यायाम करें। हफ्ते में 5 दिन साइकिलिंग, योगा या ब्रिस्क वॉकिंग करें। यह हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
- स्वस्थ आहार: अपने खाने में फल, सब्ज़ियां, नट्स और दालें बढ़ाएं। चीनी और नमक का सेवन कम करें। तला-भुना और पैकेज्ड फूड से दूर रहें।
- धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान पूरी तरह से बंद करें, क्योंकि यह हृदय रोगों का एक प्रमुख कारण है।
- ब्लड प्रेशर और शुगर नियंत्रण: अपना ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल में रखें। नियमित जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह पर उपचार लें।
- कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन: अपने कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखें। समय-समय पर इसकी जांच कराएं।
- वजन नियंत्रण: स्वस्थ वजन बनाए रखें। मोटापा हृदय रोग का एक बड़ा जोखिम कारक है।
इन उपायों को अपनाकर आप अपने हृदय को स्वस्थ रख सकती हैं और दिल की बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
निष्कर्ष
महिलाओं में हार्ट अटैक एक गंभीर वास्तविकता है, जिसे अब और नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। एस्ट्रोजन हार्मोन से जुड़ी पुरानी धारणाएं अब टूट चुकी हैं और हमें आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान की बातों पर ध्यान देना चाहिए। PCOD जैसी स्थितियां भी हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाती हैं, इसलिए प्रारंभिक पहचान और सक्रिय प्रबंधन महत्वपूर्ण है।
याद रखें, स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और नियमित स्वास्थ्य जांच करवाकर आप अपने हृदय को सुरक्षित रख सकती हैं। आपकी हृदय स्वास्थ्य ही आपके जीवन की कुंजी है। अधिक जानकारी के लिए, आप हृदय रोग के बारे में और पढ़ सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: क्या महिलाओं को पुरुषों से अलग प्रकार का हार्ट अटैक होता है?
नहीं, महिलाओं को पुरुषों की तरह ही हार्ट अटैक होता है, लेकिन उनके लक्षण अक्सर अलग और सूक्ष्म हो सकते हैं। पुरुषों में सीने में तेज दर्द या जकड़न आम है, जबकि महिलाओं में सांस फूलना, अत्यधिक थकान, पसीना आना या जबड़े में दर्द जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
Q2: एस्ट्रोजन हार्मोन महिलाओं को हार्ट अटैक से कैसे प्रभावित करता है?
रजोनिवृत्ति से पहले, एस्ट्रोजन हार्मोन महिलाओं को हृदय रोगों से कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करता है। हालांकि, यह पूर्ण सुरक्षा नहीं है और रजोनिवृत्ति के बाद यह सुरक्षा काफी कम हो जाती है, जिससे हृदय रोग का जोखिम बढ़ जाता है। अन्य जोखिम कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Q3: PCOD और हार्ट अटैक के बीच क्या संबंध है?
PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) वाली महिलाओं को मेटाबॉलिक डिसऑर्डर जैसे उच्च रक्तचाप, इंसुलिन प्रतिरोध, डायबिटीज और मोटापे का अधिक जोखिम होता है। ये सभी कारक मिलकर हृदय रोगों, जैसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज और हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ाते हैं।
Q4: युवा महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा क्यों बढ़ रहा है?
युवा महिलाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते खतरे के मुख्य कारण बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, निष्क्रियता, मोटापा, और डायबिटीज व हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों का प्रसार हैं। भारतीय महिलाओं में आनुवंशिक प्रवृत्तियां भी इसमें भूमिका निभाती हैं।
Q5: हार्ट अटैक से बचाव के लिए महिलाएं क्या कर सकती हैं?
हार्ट अटैक से बचाव के लिए महिलाएं नियमित व्यायाम (जैसे योग, ब्रिस्क वॉकिंग), स्वस्थ और संतुलित आहार (कम चीनी, नमक, तला-भुना), धूम्रपान छोड़ना, ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखना, तथा स्वस्थ वजन बनाए रखना जैसे उपाय कर सकती हैं।