लखनऊ, उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को एक बार फिर अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई, जब उन्होंने उत्तर प्रदेश के लाखों छात्रों के लिए एक बड़ी सौगात दी। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में, मुख्यमंत्री ने कक्षा 9, 10 और दशमोत्तर स्तर के कुल 27,99,982 छात्र-छात्राओं को सीधे उनके बैंक खातों में छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) ट्रांसफर की। यह धनराशि ₹3,350 करोड़ थी, जो दर्शाता है कि सरकार शिक्षा और युवा सशक्तिकरण को कितनी गंभीरता से ले रही है।
यूपी छात्रवृत्ति योजना: CM योगी ने 27 लाख से अधिक छात्रों को दी स्कॉलरशिप, विपक्ष पर साधा निशाना
इस अवसर पर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न केवल छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान की, बल्कि पिछली सरकारों पर भ्रष्टाचार और छात्रवृत्ति के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए विपक्ष पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने अपनी सरकार की पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था की सराहना की, जो सीधे लाभार्थी के खाते में पैसा भेजती है।
करोड़ों छात्रों को मिली छात्रवृत्ति: सीधे खाते में ट्रांसफर
सीएम योगी ने बताया कि उनकी सरकार ने सुनिश्चित किया है कि छात्रों को समय पर उनकी छात्रवृत्ति मिले। उन्होंने कहा, “आज सभी छात्रों को समय पर छात्रवृत्ति दी जा रही है।” इस पहल से लाखों परिवारों को लाभ हुआ है, खासकर वे जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इसके साथ ही, 33,334 गरीब परिवारों के आश्रित सदस्यों को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत ₹100 करोड़ की मदद भी दी गई, जो सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सीएम योगी की छात्रों को खास नसीहत: “परिश्रम ही मंजिल है”
छात्रों को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री योगी ने उन्हें महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा, “ये स्कॉलरशिप आपकी मंजिल नहीं है। परिश्रम आपकी मंजिल है। स्कॉलरशिप के पैसे का दुरुपयोग मत करना।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह स्कॉलरशिप केवल एक ‘प्लेटफॉर्म’ है जो उन्हें आगे बढ़ने में मदद करेगा, न कि अंतिम लक्ष्य। यह संदेश युवाओं को आत्मनिर्भरता और कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित करता है।
‘सपा सरकार में छात्रवृत्ति का पैसा डकार जाते थे लोग’ – सीएम योगी
मुख्यमंत्री ने पिछली समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के कार्यकाल में एससी-एसटी बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं दी गई और छात्रवृत्ति के पैसे को दूसरे कार्यों में डायवर्ट कर दिया गया। उन्होंने कहा, “जिन्हें मिलती थी, उनका आधा पैसा सपा के लोग डकार जाते थे।” उन्होंने याद दिलाया कि 2017 में जब उनकी सरकार सत्ता में आई, तो उन्हें सपा के कार्यकाल वाली छात्रवृत्ति भी देनी पड़ी थी। यह टिप्पणी उनकी सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाती है।
भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था: तकनीकी का लाभ
सीएम योगी ने आधुनिक तकनीक के लाभों पर प्रकाश डाला, जिसके कारण अब योजनाओं में भ्रष्टाचार संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “तकनकी का यही लाभ है कि सीधे हमने लाभार्थी के खाते में पैसा भेज दिया। इससे किसी तरह की दलाली नहीं हो सकती।” उन्होंने 2017 से पहले के भ्रष्टाचार का जिक्र किया, जिसमें कुपोषित बच्चों के पुष्टाहार से लेकर विकास और पारिवारिक लाभ की योजनाओं तक में धांधली की गई थी। उनकी सरकार ने DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित की है।
अभ्युदय कोचिंग का विस्तार: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सरकार की अन्य पहलों पर भी बात की। उन्होंने ‘अभ्युदय कोचिंग’ के विस्तार पर जोर दिया और कहा कि इसे हर जिले में वर्चुअल और फिजिकल रूप से चालू करना चाहिए। उनका मानना है कि समाज कल्याण विभाग को यूपीएससी, एनडीए, सीडीएस, आईआईटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए और काम करने की जरूरत है। उन्होंने नए चयनित अधिकारियों से भी आग्रह किया कि वे हर जिले में इस कोचिंग में एक घंटे पढ़ाएं, जिससे छात्रों को मार्गदर्शन मिल सके।
दलित महापुरुषों का सम्मान और विपक्षी दलों पर हमला
सीएम योगी ने सपा पर दलित महापुरुषों और संतों का सम्मान न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सपा को चार बार प्रदेश की सत्ता में आने का मौका मिला, लेकिन उन्होंने एक भी दलित महापुरुष या संत के प्रति सम्मान का भाव नहीं रखा। उन्होंने कन्नौज में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखे गए स्थान के नाम बदलने का उदाहरण दिया, जिसे उनकी सरकार ने बहाल किया। उन्होंने लखनऊ में भाषा विश्वविद्यालय का नाम कांशीराम के नाम से बदलने और फिर बहाल करने का भी उल्लेख किया। सीएम ने कहा कि विपक्ष भारत के प्रतीकों और संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करके बाबा साहब का अपमान करता है।
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उत्तर प्रदेश: बीमारु राज्य से ग्रोथ इंजन तक का सफर
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सपा जैसी पार्टियों के चलते उत्तर प्रदेश एक बीमारु राज्य बन गया था, जहां युवाओं के सामने पहचान का संकट था। उन्होंने कहा, “सत्ता में थे तो सिर्फ परिवार के भरण का ख्याल था। तुष्टीकरण के नाम पर राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करते थे।” सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि आज उनका प्रदेश पहचान के संकट से मुक्त हो चुका है, बीमारी से उबर चुका है और भारत की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ का इंजन बन चुका है। यह बयान राज्य के विकास और प्रगति के प्रति उनकी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम न केवल छात्रों के लिए एक आर्थिक सहारा है, बल्कि यह सरकार की पारदर्शिता, जवाबदेही और शिक्षा के प्रति समर्पण का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उनकी सरकार शिक्षा, युवाओं और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के लिए प्रतिबद्ध है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: सीएम योगी ने कितने छात्रों को छात्रवृत्ति दी?
उत्तर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुल 27,99,982 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की।
प्रश्न 2: छात्रों के खातों में कितनी राशि ट्रांसफर की गई?
उत्तर: कुल ₹3,350 करोड़ की राशि सीधे छात्रों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई।
प्रश्न 3: छात्रवृत्ति के अलावा और कौन सी सहायता दी गई?
उत्तर: 33,334 गरीब परिवारों के आश्रित सदस्यों को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत ₹100 करोड़ की मदद भी दी गई।
प्रश्न 4: सीएम योगी ने छात्रों को क्या मुख्य सलाह दी?
उत्तर: सीएम योगी ने छात्रों को सलाह दी कि “स्कॉलरशिप आपकी मंजिल नहीं है, परिश्रम आपकी मंजिल है। स्कॉलरशिप के पैसे का दुरुपयोग मत करना।”
प्रश्न 5: क्या यह छात्रवृत्ति योजना केवल अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों के लिए है?
उत्तर: नहीं, न्यूज़ स्निपेट में कक्षा 9 व 10 के साथ-साथ दशमोत्तर स्तर के कुल छात्रों का उल्लेख है, जिसमें सभी वर्गों के छात्र शामिल हैं। हालांकि, सीएम ने सपा सरकार पर एससी-एसटी छात्रों को छात्रवृत्ति न देने का आरोप लगाया था, वर्तमान वितरण सभी के लिए है।